बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में कई नेताओं के नाम काट दिए। साथ ही लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा। उन्हें टिकट की उम्मीद थी पर टिकट नहीं मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय में काम कर रहे अधिकारियों को टिकट नहीं मिला। मुख्यमंत्री के सिपहसालार चुनाव लड़ने की लाइन में थे।
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात रहे भाजपाइयों को पार्टी से काफी निराशा मिली है। ये लोग लंबे समय से विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। पार्टी से बंधे ये नेता अब किसी तरह का विरोध करने की भी स्थिति में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न पदों पर काम कर चुके नौ नेता चुनाव लड़ने वालों की लाइन में शामिल थे। इनमें से कुछ नाम उम्मीदवारों के पैनल में शामिल भी हो चुके थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उनके नाम पर विचार नहीं किया।
'मुझे तो पहले ही मना हो गया था'
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में दो से तीन नामों पर काफी चर्चा भी हुई, लेकिन फिर भी उन्हें टिकट नहीं मिल पाए। मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी व भाजपा के मुख्य प्रवक्ता जवाहर यादव बादशाहपुर से चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने यहां पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर को टिकट दे दिया है।
राव की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के तुरंत बाद जवाहर यादव ने एक पोस्ट जारी करते हुए कहा कि मुझे काफी पहले टिकट से मना हो गया था, इसलिए मैं चुनाव नहीं लड़ने जा रहा हूं।
किसको नहीं मिला टिकट
- जवाहर यादव: सीएम के पूर्व ओएसडी व मुख्य प्रवक्ता
- अभिमन्यु सिंह: सीएम के पूर्व निजी सचिव और पूर्व ओएसडी
- अजय गौड़: मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सचिव
- भूपेश्वर दयाल: सीएम के पूर्व ओएसडी
- भूपेंद्र सिंह: मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी
- अमरजीत सिंह: सीएम के पूर्व ओएसडी एवं एससीएस अधिकारी
- तरुण भंडारी: सीएम के प्रचार सलाहकार
- राजीव जेटली: सीएम के मीडिया सलाहकार (नई दिल्ली)
- कृष्ण बेदी: सीएम के पूर्व राजनीतिक सचिव एवं प्रदेश महामंत्री
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