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इसी बीच एक्ट्रेस ने हाल ही में खुलासा किया कि वह म्यूकोसाइटिस से पीड़ित हैं। यह कीमोथेरेपी का एक साइड इफेक्ट है जिसकी वजह से एक्ट्रेस काफी तकलीफ हैं। आइए जानते हैं इस कंडीशन के बारे में सबकुछ।

 टीवी जगत की जानी मानी एक्ट्रेस हिना खान इन दिनों ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करा रही हैं। एक्ट्रेस इस खतरनाक कैंसर के थर्ड स्टेज पर हैं और उन्होंने इस बारे में खुद कुछ महीने पहले खुलासा किया था। इस बीमारी का शिकार होने के बाद से भी एक्ट्रेस बड़ी हिम्मत के साथ इसका सामना कर रही हैं। इसके ट्रीटमेंट के लिए वह इन दिनों कीमोथेरेपी भी ले रही हैं और समय-समय पर अपने फैंस के साथ खुद से जुड़ी अपडेट्स शेयर करती रहती हैं।

इसी बीच अब एक्ट्रेस ने फैंस के साथ एक ऐसी खबर शेयर की, जिसे जानने के बाद उनके फैंस काफी परेशान हो गए हैं। दरअसल, एक्ट्रेस ने बताया कि वह अब म्यूकोसाइटिस (Mucositis) से पीड़ित हैं। इस बारे में उन्होंने एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया यह कीमोथेरेपी का एक साइड इफेक्ट है, जिसकी उन्हें खाने-पीने में दर्द का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे इस कंडीशन से जुड़ी सभी जरूरी बातों के बारे में-

क्या है म्यूकोसाइटिस?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक म्यूकोसाइटिस एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें मुंह या आंत में दर्द के साथ सूजन हो जाती है। यह समस्या मुख्य रूप से आपके पाचन तंत्र प्रभावित होता है। यह कंडीशन आमतौर पर के कुछ ट्रीटमेंट जैसे कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के साइड इफेक्ट के रूप में हो सकती है।

म्यूकोसाइटिस के लक्षण

यूके नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के मुताबिक पीड़ित के मुंह में म्यूकोसाइटिस के लक्षण आमतौर पर कीमोथेरेपी शुरू करने के लगभग एक हफ्ते बाद या रेडियोथेरेपी शुरू करने के लगभग 2 सप्ताह बाद शुरू होते हैं। मुंह के इसके लक्षण निम्न हैं-

  • मुंह और मसूड़े में सूजन
  • मुंह का सूखना
  • गाढ़ी लार
  • मुंह के छाले
  • पस भरे सफेद धब्बे
  • निगलने, बात करने या खाने में कठिनाई
  • खून बहना

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकोसाइटिस के लक्षण

  • लालिमा (एरिथेमेटस म्यूकोसा)
  • पेट में दर्द
  • मलती और उल्टी
  • दस्त लगना
  • मल में खून या म्यूकस आना
  • एक्सक्रिशन के दौरान तेज दर्द

म्यूकोसाइटिस का कारण

यह कंडीशन तब होती है, जब कैंसर का ट्रीटमेंट मुंह से लेकर एनस तक पाचन तंत्र की तेजी से बढ़ने वाली सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। यह डैमेड सेल्स को अल्सर और संक्रमण के प्रति सेसिंटिव बना देती है।