केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजभाषा विभाग के स्वर्ण जयंती समारोह में कहा कि भारतीय भाषाएं देश को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं, तोड़ने का नहीं। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासन मातृभाषा में होना चाहिए ताकि देश अपनी संस्कृति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ सके। शाह ने स्पष्ट किया कि हिंदी किसी भी भारतीय भाषा की विरोधी नहीं, बल्कि सखी है।
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा हिंदी के खिलाफ लगातार दिये बयानों के बीच केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि भारतीय भाषाओं को देश को तोड़ने का नहीं, बल्कि जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनना चाहिए।।
गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि किसी भी देश को अपनी चेतना और अपनी संस्कृति के आधार पर आगे बढ़ने के लिए उसके प्रशासन का संचालन मातृभाषा में जरूरी है।
'हिंदी भारतीय भाषाओं की सखी'
अमित शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग की स्थापना का उद्देश्य देश का शासन नागरिकों की भाषा में चलाने और प्रशासन में भारतीय भाषाओं का उपयोग कर देश के आत्मसम्मान को जागृत करने के लिए किया गया था। कोई भी देश अपनी भाषा के बिना अपनी संस्कृति, साहित्य, इतिहास और सामाजिक संस्कार को चिरंजीव नहीं रख सकता। अपनी संस्कृति के आधार पर आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए देश का शासन उसकी अपनी भाषाओं में होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 50 वर्ष की यह यात्रा संघर्ष, साधना और संकल्प के आधार हम सबने मिलकर पूरा किया है। अमित शाह ने साफ किया कि हिंदी किसी भी भारतीय भाषा की विरोधी नहीं हो सकती। यह सभी भारतीय भाषाओं की सखी है। हिंदी और भारतीय भाषाएं मिलकर ही हमारे आत्मगौरव के उत्थान के कार्यक्रम को अंतिम लक्ष्य तक ले जा सकती हैं। उन्होंने राज्यों और भारत सरकार का प्रशासन भारतीय भाषाओं के आधार पर चलाने के लिए मदद का भरोसा भी दिया।
भारतीय भाषाओं में होगी पढ़ाई
मोदी सरकार द्वारा भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए किये जा रहे प्रयासों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में 12 भाषाओं में तकनीकी शिक्षा की शुरूआत हुई है। मध्य प्रदेश ने हिंदी में मेडिकल शिक्षा की शुरूआत की है, पूरा पाठ्यक्रम बनाया है और आने वाले दिनों में अन्य राज्य भी भी मेडिकल शिक्षा का पूरा पाठ्यक्रम अपनी भाषाओं में तैयार कर बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
उन्होंने सभी राज्य इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा अपने राज्य की भाषा में उपलब्ध कराने की अपील की।अमित शाह के अनुसार उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा होती है। हमारी जड़ें, परंपराएं, इतिहास, पहचान और जीवन संस्कृति भाषा से कटकर आगे नहीं बढ़ सकते और भाषाओं को जीवंत रखना और समृद्ध करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हमें आने वाले दिनों में सभी भारतीय भाषाओं और विशेषकर राजभाषा के लिए सभी प्रयास करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति बहुत महत्वपूर्ण प्रण है। जब तक व्यक्ति अपनी भाषा पर गौरव नहीं करता, अभिव्यक्ति, सोच, विश्लेषण और निर्णय लेने की क्षमता को अपनी भाषा में नहीं गढ़ता, तब तक हम गुलामी की मानसिकता से मुक्त नहीं हो सकते।
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