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दिल्ली में पुराने वाहनों पर रोक के खिलाफ भाजपा सरकार अदालत जाने की तैयारी में है। परिवहन मंत्री ने कहा कि सरकार इस कार्रवाई के पक्ष में नहीं है लेकिन पूर्व की केजरीवाल सरकार की विफलता के कारण यह स्थिति आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुंबई और कलकत्ता में प्रतिबंध नहीं है तो दिल्ली में क्यों है?

उम्र पूरी कर चुके वाहनों की धरपकड़ के लिए अभियान शुरू होने के एक दिन बाद ही दिल्ली की भाजपा सरकार ने इस मामले में अदालत जाने की घोषणा कर दी है।

दरअसल कार्रवाई के पहले ही दिन लोगों में नाराजगी देखने को मिली है, जबकि रेखा गुप्ता सरकार जनता के साथ मिलकर काम करने की रणनीति अपना रही है। विरोध को देखते हुए सरकार को इस बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी है।

मंत्रियाें ने कहा- सरकार इस कार्रवाई के पक्ष में नहीं

परिवहन मंत्री डाॅ. पंकज सिंह और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में प्रेसवार्ता कर साफ किया कि उनकी सरकार इस कार्रवाई के पक्ष में नहीं है।

कहा कि 10 साल तक सत्ता में रही पूर्व की केजरीवाल सरकार के प्रदूषण के मामले में नाकारेपन का फल जनता को भुगतना पड़ रहा है। प्रदूषण रोकने के लिए काम किया होता तो आज ये हालात नहीं होते।

सिरसा ने कहा कि अदालत में आप सरकार ने ठीक से पक्ष नहीं रखा और प्रदूषण पर रोक नहीं लगा पाई। इस कारण अदालत ने दिल्ली में वाहनों पर रोक लगाई है।

मुंबई व कोलकाता में बैन नहीं तो दिल्ली में क्यों ?

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुंबई और कोलकाता में डीजल के वाहनों पर 10 साल के बाद और पेट्रोल वाहनों पर 15 साल के बाद प्रतिबंध नहीं है तो दिल्ली में वाहनों पर प्रतिबंध क्यों है?

उन्होंने कहा कि इस मामले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और सुप्रीम कोर्ट को बताया जाएगा कि दिल्ली में प्रदूषण रोकथाम के लिए उनकी सरकार प्रभावी कदम उठा रही है।

एक तरफ लैंडफिल साइटों को हटाने के लिए उनकी सरकार कमर कस चुकी है ताे दूसरी ओर प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों पर प्रहार किया जा रहा है।

सिरसा ने कहा कि अदालत ने पूर्व की केजरीवान सरकार को बार-बार मौका दिया कि दिल्ली के हालात ठीक करो, दिल्ली गैस चैंबर बन गई है, मगर केजरीवाल की सरकार ने काेई काम नहीं किया, कहा कि केजरीवाल ने 10 साल में दिल्ली को और बदहाल कर दिया, सुप्रीम काेर्ट को प्रतिबंध लगाना पड़ा।