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बरेली के जोगी नवादा में 32 साल पुराना विवाद सौहार्दपूर्ण समझौते से खत्म हो गया। मोहर्रम में हिंदुओं ने ताजियादारों को माला पहनाई तो अब मुस्लिम पक्ष कांवड़ियों का स्वागत करने को तैयार है। श्रावण मास में कांवड़ियों पर फूलों की वर्षा की जाएगी। दोनों पक्षों ने मिलकर 18 बैठकें कीं जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

बरेली। कटु अनुभव देने वाले 32 वर्ष पुराने विवाद को सौहार्द की सोच ने खत्म कर दिया। मोहर्रम के जुलूस में हिंदुओं ने ताजियादारों को मालाएं पहनाई थीं। अब मुस्लिम पक्ष कांवड़ियों को स्वागत के लिए उत्सुक हैं। श्रावण में शिवालयों की ओर जाने वालों पर सद्भाव के पुष्प बरसाए जाएंगे।

एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं के आदर का यह संकल्प मिश्रित आबादी वाले जोगी नवादा में मैत्री की सुगंध फैला रहा है। गुरुवार दोपहर भी जोगी नवादा में बैठे दोनों पक्षों के लोग कांवड़ियों के स्वागत की रूपरेखा तय कर रहे थे। इस क्षेत्र के लोगों ने कई बार बवाल देखे हैं। मोहर्रम के जुलूस के दौरान पीपल के पेड़ की डाल सड़क तक आने पर विवाद होता था।

उस दौरान एक पक्ष धार्मिक पहलू बताते हुए पीपल की डाल काटने पर आपत्ति जताता था। दूसरा पक्ष अपने ताजिये की ऊंचाई कम करने पर राजी नहीं होता था। ताजिया पेड़ से नहीं टकराए इसलिए पुलिस को सड़क में गड्ढा करना होता था। इसी तरह श्रावण में कांवड़ियों के जत्थे में म्यूजिक सिस्टम की आवाज तो कभी रूट पर आपत्ति होती थी।

2023 में कांवड़ यात्रा के दौरान इतना बवाल हुआ कि नियंत्रण करने में पुलिस के पसीने छूट गए थे। 2024 में भी दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जुलूस-यात्राओं का विरोध किया था। उस समय पुलिस व प्रशासन की टीमों को कई दिन तक क्षेत्र में डेरा डालना पड़ा था। मोहर्रम से श्रावण मास के अंत तक क्षेत्र में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात की गई थी।

इस बार कोई विवाद न पनपे, इसके लिए एसएसपी अनुराग आर्य ने सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में की टीमें बनाईं। सीओ ने दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग और बाद में संयुक्त बैठकें कीं। उनकी शिकायतें सुनीं, समाधान के विकल्प दिए। 18 बैठकों के बाद दोनों पक्षों के लोगों ने लिखित समझौता किया कि अब उन्हें किसी बात पर आपत्ति नहीं है।

वे धार्मिक आयोजनों में आने वाली बाधाओं को एक-दूसरे के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए दूर कर लेंगे। इसका आरंभ मोहर्रम के जुलूस में हुआ। उस दिन हिंदुओं ने ताजियादारों (ताजिया लेकर जाने वाले लोग) को मालाएं पहनाकर मुहल्ले से रवाना किया था। अब श्रावण मास में कांवड़ियों के जत्थे जल लेकर जाएंगे।

इसी मुहल्ले में होते हुए विभिन्न नाथ मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। मुस्लिम पक्ष के लोगों ने तय किया कांवड़ियों के जत्थों को पुष्पवर्षा कर रवाना करेंगे। वापसी में भी उनका स्वागत किया जाएगा। मुहर्रम पर हिंदुओं ने मिसाल पेश की थी, अब कांवड़ यात्रा में मुस्लिम पक्ष सौहार्द की जिम्मेदारी निभाएगा। कांवड़ियों का पहला जत्था रविवार सुबह को रवाना होगा। श्रावण के अगले सप्ताह में दूसरा, फिर तीसरा जत्था जल लेने जाएगा।