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पिथौरागढ़ में 1997 से पहले थल-मुनस्यारी मार्ग पर लेकघाटी के पास एक दर्दनाक बस दुर्घटना हुई। पिथौरागढ़ से थल जा रही केमू बस खाई में गिरने से 48 लोगों की मौत हो गई जिनमें बच्चे भी शामिल थे। यह जिले की सबसे बड़ी वाहन दुर्घटना थी। दीपावली का समय होने के कारण बस में यात्रियों की भारी भीड़ थी। बचाव कार्य में 36 घंटे से अधिक लगे। 

पिथौरागढ़। थल-मुनस्यारी मार्ग पर वर्ष 1997 से पूर्व लेकघाटी के पास जिले की सबसे बड़ी वाहन दुर्घटना हुई थी। पिथौरागढ़ से थल को जा रही केमू की बस लगभग 40 किमी दूर लेकघाटी के पास तीक्ष्ण गहरी खाई में गिर गई। बस में सवार 48 लोगों की मौत हो गई थी। यह वाहन दुर्घटना इस मार्ग की ही, बल्‍क‍ि जिले की सबसे बड़ी वाहन दुर्घटना थी। नौ साल बाद घाट के पास दिल्ली बैंड के पास हुई रोडवेज बस दुर्घटना में मृतक संख्या 51 होने के बाद यह जिले की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना हो गई।

वर्ष 1989 के नवंबर माह का प्रथम सप्ताह था और दीपावली का पर्व चल रहा था। उस समय जिले में यातायात का माध्यम केवल रोडवेज और केमू की बसें होती थी। दीपावली पर अपने घरों को जाने वालों की संख्यसा काफी अधिक रहती थी। बसें खचाख्च रहती थी।

पिथौरागढ़ से मुवानी, थल-बेरीनाग को जाने वाले अधिकांश लोग दिन में पिथौरागढ़ से थल तक चलने वाली केमू की बस में ही सफर करते थे। धनतेरस के दिन क्षेत्र के पिथौरागढ़ में कार्य करने वाले और खदीददारी के लिए आए लोग इसी बस से दीपावली मनाने घरों को जा रहे थे। बस ठसाठस भरी थी ।

पिथौरागढ़ से बस लगभग 40 किमी दूर लेकघाटी पहुची तो मार्ग के सबसे खतरनाक माने जाने वाले लेकघाटी में बस एक संकरी और तीन सौ मीटर से अधिक गहरी खाई में गिर गई थी। घटनास्थल पर शव और दीपावली का सामान बिख्ररा था। एक दो लोग जो बस के खाई में पहुंचने से छिटके थे वही जिंदा रहे वे भी माहों तक अस्पताल में रहे। सभी शवों को खाई से निकालने में 36 घंटे से भी अ धिक का समय लगा था। 48 लोगों की जान चली गई। जिनमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहे। 

 

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