Bareilly
छत के नीचे रहकर, आंगन ना पाओगे।
तुम कमरे के भीतर, सावन ना पाओगे।।
जो इंद्रधनुष देखें, वो बाहर आ भीगें।
अंत:मन शीतल हो, बूदों में वो भीगें।।
घर के अंदर छिपकर, जीवन ना पाओगे।।
तुम कमरे के भीतर...........
झर - झर झरती बूंदें, अंतर्मन हर लेतीं।
आदर - अभिनंदन से, नववंदन कर लेतीं।।
बैठे रहकर बचकर, चंदन ना पाओगे।।
तुम कमरे के भीतर..............
धरती स्वागत करती, हर बूंदों का हंसकर।
तुम भी बाहर आकर, स्वागत कर लो जमकर।।
आलस में सुध खोकर, मन- धन ना पाओगे।।
तुम कमरे के भीतर.............
"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
- Log in to post comments
- 2 views