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सुप्रीम कोर्ट में राज ठाकरे के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने भाषा विवाद को बढ़ावा देने वाले राज ठाकरे के भाषणों के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि राज ठाकरे ने हिंदी भाषियों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए हैं जिससे विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ी है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। इस याचिका में भाषा विवाद को बढ़ावा देने वाले राज के भाषणों के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का महाराष्ट्र पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई है।

नहित याचिका में कई गई ये बात 

याचिका के अनुसार, राज ने समय-समय पर हिंदी बोलने वाले लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए हैं, जिससे जन्म स्थान, निवास और भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को भड़काया जा रहा है, जो न केवल सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक है, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए भी खतरा है।

ऐसी घटनाओं से कठोरता से निपटने की मांग

याचिका में कहा गया है कि केंद्र और महाराष्ट्र की सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि राज और उनके राजनीतिक संगठन द्वारा ऐसी घटनाएं न हों और इन घटनाओं से कठोरता से निपटा जाए।

MNS की राजनीतिक मान्यता को रद करने की मांग

अधिवक्ता घनश्याम दयालू उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका ने भारत के चुनाव आयोग और महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग से राज ठाकरे की एमएनएस की राजनीतिक मान्यता को वापस लेने का निर्देश देने की भी मांग की है।

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