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Agra: गैस बुकिंग व्यवस्था हुई फेल, 1700 रुपये में बिक रहा घरेलू सिलिंडर; कालाबाजारी का खेल हुआ शुरू

आगरा के ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं, ऑनलाइन बुकिंग और ओटीपी की समस्या से सिलिंडर नहीं मिल पा रहा। स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग कालाबाजारी में 1700 रुपये तक में घरेलू गैस सिलिंडर बेच रहे हैं

जिले के ग्रामीण अंचलों में रसोई गैस की भारी किल्लत है। ऑनलाइन बुकिंग के लिए सर्वर का साथ न देना उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। लोग दिन-रात बुकिंग की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण सफलता नहीं मिल रही। बिना बुकिंग और ओटीपी के एजेंसियां सिलिंडर देने से इंकार कर रही हैं, जिससे लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।

बुकिंग एवं केवाईसी की समस्या बरकरार
बरौली अहीर में घरेलू गैस सिलिंडर की बुकिंग नहीं हो रही है। धांधूपुरा में नरेश इंडेन गैस सर्विस का गोदाम गैस सिलिंडर न होने के कारण बंद था। उपभोक्ता खाली सिलिंडर के साथ वापस लौट रहे थे। धांधूपुरा निवासी पूरन सिंह सिंह ने बताया कि पांच दिनों से ऑफिस और गोदाम के चक्कर लगा रहा हूं। यहां एक हाॅकर ने 1700 रुपये में घरेलू गैस सिलिंडर बेचा। सचिन सिंह ने बताया कि बहन की शादी है, गोदाम से सिलिंडर मिल नहीं रहा है इसलिए मजबूरी में हाॅकर से 3400 रुपये में दो लिए हैं।

लकड़ी से बनाना पड़ रहा खाना
 मुकेश कुमार और काली नगर के कैलाश ने बताया कि कई दिनों से गैस खत्म है, लेकिन ऑनलाइन बुकिंग का नंबर लगातार बिजी जा रहा है। मजबूरी में लोग होटलों से खाना मंगा रहे हैं या लकड़ी के चूल्हों पर लौट रहे हैं। बटेश्वर इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक विष्णु यादव का कहना है कि सिलिंडर पर्याप्त हैं, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह ओटीपी आधारित होने के कारण बिना बुकिंग सिलिंडर देना संभव नहीं है।

व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बहाल होने के साथ कारोबारियों की खत्म होंगी दुश्वारियां
केंद्र सरकार के व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति व बिक्री शुरू करने के आदेश के साथ ही ताजनगरी के कारोबारियों की पिछले पांच दिन से चल रही दुश्वारियां खत्म हो जाएंगी। व्यावसायिक गैस सिलिंडर (19 किग्रा) की आपूर्ति अब फिर से सुचारू होने जा रही है। इससे हजारों छोटे-बड़े खान-पान केंद्रों को संजीवनी मिलेगी, बल्कि बंदी की कगार पर पहुंचे कारोबार में भी तेजी आएगी।

बता दें, कि सिलिंडर की किल्लत के चलते ताजनगरी के पेठा उद्योग, रेस्तरां, हलवाई और ढाबा संचालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ठेल-ढकेल व खोखे पर चलने वाली चाय की दुकानें बंद हो गई थीं। आपूर्ति रुकने से कई इकाइयों में उत्पादन ठप हो गया था, जिसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ रहा था। अब तेल कंपनियों के आपूर्ति सामान्य करने के फैसले से बाजार में छाई मायूसी दूर होने की उम्मीद है। शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया सिलिंडर नहीं मिलने से कारोबार ठप पड़ा था।

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