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 राजधानी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से क्यों इस्तीफा देने की घोषणा की है। इसके पीछे आम आदमी पार्टी AAP की बड़ी रणनीति है। इससे पहले 2015 में भी केजरीवाल के इस्तीफा देने पर आप को बड़ा फायदा मिला था। अब केजरीवाल द्वारा इस्तीफा का एलान करने के पीछे क्या प्लान है इन प्वाइंट्स में समझिए।

नई दिल्ली:- मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफे की घोषणा कर बड़ा दांव खेला है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने की घोषणा कर केजरीवाल ने विरोधियों को जवाब देने के साथ जनता की अपने साथ और मजबूती से जोड़ने का प्रयास किया है।

भाजपा के इस आरोप का जवाब दिया है कि वह कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते हैं। वहीं जनता में भी संदेश दे दिया है कुर्सी से उन्हें बहुत लगाव नहीं है। केजरीवाल ने यह दांव खेलकर लगातार हमलावर विपक्षियों का मुंह बंद करने की कोशिश की 

केजरीवाल के इस्तीफा देने के पीछे कुछ खास प्वाइंट्स

. केजरीवाल ने जनता को संदेश दिया कि उन्हें कुर्सी से बहुत लगाव नहीं है।

. सीएम अरविंद केजरीवाल ने यह दांव खेलकर लगातार हमलावर विपक्षियों का मुंह बंद करने की कोशिश की।

. मुख्यमंत्री ने अपनी ‘कट्टर ईमानदार’ की छवि को मजबूत करने का प्रयास किया है।

. हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर जनता के बीच अपनी छवि बनाने के लिए यह अहम निर्णय लिया।

. 2015 में केजरीवाल के इस्तीफा देने पर हुए चुनाव में आप को विशाल बहुमत के साथ 70 में से 67 सीटें मिली थीं।

. केजरीवाल द्वारा इस्तीफे का एलान करने से बीजेपी की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि 2015 में भी सीएम ने एसा ही दांव चला था। जिसमें आप को बड़ी सफलता मिली थी।

. केजरीवाल के जेल जाने से उनकी छवि पर असर पड़ा है, उसे ही सुधारने के लिए यह प्रयास किया गया है।

.   दिल्ली की जनता को अच्छे स्कूल, अच्छे अस्पताल और बिजली-पानी फ्री समेत महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा दिलाने का एहसास कराने की भी कोशिश है।

. केजरीवाल अपने पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की जनता की मन की बात भी जानना चाहते हैं।

. अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को गलत बताते हुए केजरीवाल ने यह एलान किया है। उन्होंने यह कदम उठाकर अपनी छवि को साफ बताने की कोशिश की। 

'इट्टर ईमानदार' छवि को मजबूत करने का प्रयास

इस घोषणा के साथ उन्होंने अपनी ‘कट्टर ईमानदार’ की छवि को मजबूत करने का प्रयास किया है। आप इसका लाभ हरियाणा और आगे चलकर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उठाने की कोशिश करेगी। 2013 के विधानसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिलने पर पहली बार कांग्रेस के साथ मिलकर 49 दिन की सरकार चलाने के बाद केजरीवाल के इस्तीफा देने पर 2015 में हुए चुनाव में आप को विशाल बहुमत के साथ 70 में से 67 सीटें मिली थीं।

जेल जाने से केजरीवाल की छवि पर पड़ा असर

इससे पहले 2013 के चुनाव में आप को 28 और कांग्रेस को 8 सीट मिली थीं। भाजपा को 32 सीटें मिली थीं। इसे भले ही आम आदमी पार्टी न माने, मगर जेल जाने से केजरीवाल की छवि पर असर पड़ा है। केजरीवाल का मतलब आम आदमी पार्टी से है। केजरीवाल को खुद एक पार्टी के रूप में देखा जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो आम आदमी पार्टी की छवि ही केजरीवाल से है।

केजरीवाल ने की इस्तीफा देने की घोषणा

विपक्षी दलों की साजिश बताकर आप के नेता यह बात पिछले एक साल से हर मंच पर कह रहे हैं कि केजरीवाल की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। रविवार को अरविंद केजरीवाल CM Kejriwal Speech ने पार्टी कार्यालय में आयोजित जिस कार्यक्रम में इस्तीफा देने की घोषणा की है, इसमें उन्होंने अपनी छवि पर उठाए जा रहे सवालों का भी जिक्र किया।

भाजपा द्वारा केजरीवाल को कहा जा रहा चोर

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें भाजपा द्वारा चोर कहा जा रहा है। यह सब ऐसे मुद्दे हैं जो इन्हें अहसास करा रहे थे कि भाजपा द्वारा उनके खिलाफ आक्रामक तरीके से चलाए जा रहे अभियान से कहीं न कहीं उन्हें नुकसान हो रहा है। इससे पहले केजरीवाल ने अपने बारे में भी लोगों को बताया कि वह दिल्ली की जनता के लिए काम इसलिए करा सके क्योंकि वह ईमानदार थे।

स्कूल से लेकर बिजली-पानी दिया फ्री

उन्होंने स्कूल अच्छे किए हैं, अस्पताल अच्छे किए हैं, बिजली-पानी फ्री दे रहे है, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा दे रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह सब इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी सरकार ईमानदार सरकार है। यहां गौरतलब है कि यह सब बताने के पीछे जनता को यह फिर से याद दिलाना था कि वह ईमानदार हैं और ईमानदारी से काम कर रहे हैं।

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