आचार्य चाणक्य द्वारा लिखा गया नीतिशास्त्र सबसे लोकप्रिय शास्त्रों में शामिल है। आज भी लोग इसमें कही गई बातों को जीवन में अपनाते हैं। चाणक्य नीति में कुछ ऐसे लोगों के बारे में भी बताया है जो हमेशा खुश रहते हैं। इतना ही नहीं ये लोग अपने आस-पास के माहौल को भी खुशनुमा कर देते हैं। चलिए जानते हैं इनके बारे में।
आचार्य चाणक्य सबसे बुद्धिमान और प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माने जाते हैं। उनके द्वारा रचित नीति शास्त्र में जीवन के कई पहलुओं का वर्णन मिलता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आचार्य चाणक्य के अनुसार वह कौन-से लोग हैं, जो हमेशा खुश रहते हैं और उनका प्रभाव अन्य लोगों के व्यवहार और वाणी पर भी पड़ता है।
इस श्लोक में मिलता है वर्णन
इस श्लोक में चाणक्य कुछ ऐसे लोगों के बारे में बता रहे हैं, जो हमेशा स्वयं तो खुश रहते ही हैं, साथ ही अपने आस-पास के लोगों में भी खुशी का माहौल बना देते हैं।
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।
श्लोक का अर्थ - इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को वाणी के उपयोग में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, अर्थात, उसे उदार होकर हमेशा मधुर बोलना चाहिए। ऐसे लोग खुद तो खुश रहते ही हैं, साथ ही दूसरों को भी अपना वाणी से प्रसन्न कर देते हैं। इस लोगों के आस-पास रहने वाले लोग भी पॉजिटिव होने लगते हैं और उनके व्यवहार व वाणी में भी परिवर्तन आता है।
मीठी वाणी के हैं इतने फायदे
मीठी वाणी बोलने वाले व्यक्ति को सभी लोग पसंद करते हैं और उस व्यक्ति के प्यार से बात करते हैं। मीठी वाणी बोलने से स्वयं का और दूसरों का मन प्रसन्न रहता है, जिससे व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। साथ ही मधुर वाणी से किसी भी व्यक्ति मनुष्य को अपना बनाया जा सकता है। इसलिए कभी गुस्से में भी अभद्र या अपशब्दों का उपयोग न करें, क्योंकि एक बार जो शब्द मुंह से निकल जाता है वह कभी वापस नहीं जाता। आपने यह तो सुना होगा ही कि शब्दों द्वारा दिए गए आप घाव कभी नहीं भरते।
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