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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ राज्यसभा में विपक्ष द्वारा दिए गए महाभियोग नोटिस में कई त्रुटियां पाई गई हैं। सूत्रों के अनुसार न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पहले लोकसभा में शुरू होगी। सरकार इस प्रस्ताव को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कड़ी कार्रवाई के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर राज्यसभा में विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस को भले ही तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ ने उस समय स्वीकार करते हुए महासचिव को जांचने के लिए भेज दिया था, लेकिन अब जो जानकारी मिल रही है, उसके तहत इस नोटिस में कई त्रुटियां पायी गई है

साथ ही इसे सदन में औपचारिक रूप से पेश भी नहीं किया गया है, ऐसे में इसे रद किया जा सकता है। साथ ही लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष व विपक्ष की ओर से संयुक्त रूप से एक नया प्रस्ताव दिया जा सकता है।

लोकसभा में शुरू होगी प्रक्रिया

सरकार से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए है, कि न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया सबसे पहले लोकसभा में शुरू होगी। वैसे भी जो नियम है उसके तहत जिस सदन में पहले प्रस्ताव स्वीकार जाता है, वहीं सबसे पहले प्रक्रिया शुरू होगी। इस दौरान दोनों सदनों की सहमति से जल्द ही तीन सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की जाएगी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट 

 

यही वजह है कि राज्यसभा में सरकार के इस रुख के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने को लेकर धनखड़ और सरकार के बीच तनातनी की स्थिति बन गई। इसके चलते धनखड़ ने बाद में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।

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