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लखनऊ में नकली दवाओं का कारोबार उजागर हुआ है। आगरा से जुड़े व्यापारियों के माध्यम से करोड़ों की नकली दवाएं लखनऊ के थोक और खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचीं। एफएसडीए ने 20 मेडिकल स्टोरों की जांच की है और उन्हें स्टॉक वापस लेने के लिए कहा गया है। आयुक्त राजेश कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

लखनऊ। नकली दवाओं का व्यापार आगरा ही नहीं प्रदेश भर में फैला हुआ है। करोड़ों की रुपये दवाएं कई बड़े थोक व्यापारियों के पास खपा दी गई थीं। इसमें लखनऊ के भी थोक व फुटकर व्यापारी शामिल थे। आगरा में जांच के बाद ऐसे 20 मेडिकल स्टोर के नाम सामने आए हैं।

खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन (एफएसडीए) के अधिकारियों ने इन सभी मेडिकल स्टोर में दवा के स्टाक की जांच की है। फुटकर दवा व्यापारियों से दवा वापस मंगाने के लिए कहा गया है।आगरा की हे मां मेडिकल और बंसल एजेंसी से कथित नकली दवाएं प्रदेश के बड़े थोक दवा व्यापारियों तक पहुंच गई थी।

सहायक आयुक्त एफएसडीए आगरा ने इन एजेंसियों की जांच के बाद 20 मेडिकल स्टोर की सूची लखनऊ के अधिकारियों को भेजी थी।

इनमें बृज बिहारी फार्मा, दीप मेडिकल एजेंसीज, गौरी फार्मास्युटिकल्स, हर्षित फार्मा, नीलकंठ इंटरप्राइजेज, प्रिया फार्मा, राजा ट्रेडर्स, श्री महावीर डिस्ट्रीब्यूटर्स, श्री लक्ष्मी फार्मा, सुखमनी फार्मा, सनी ट्रेडर्स, अवध मेडिकल्स, फार्मा ट्रेडर्स, आनंद फार्मा, बाबी फार्मास्युटिकल्स, ओम साई राम, तुम दाता का नाम था।

एफएसडीए के अधिकारियों ने बताया कि इन सभी दवा कंपनियों की जांच कई टीम बनाकर की गई। इन मेडिकल स्टोर से दवाओं को फुटकर विक्रेताओं को भी बेच दिया गया था। स्टाक की जानकारी लेकर सभी को नोटिस देकर दवाएं वापस मंगाने के लिए कहा गया है।

वहीं नकली दवाओं का मामला सामने आने के बाद लखनऊ के सुखमनी फार्मा ने दवाएं आगरा की एजेंसियों को वापस कर दी थी। इन्हें भी जब्त कर लिया गया है।

खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन विभाग के आयुक्त राजेश कुमार का कहना है कि नकली दवाओं के मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है। पूरे नेटवर्क का पता लगाकर लगातार कार्रवाई हो रही है। दवाओं की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। गड़बड़ी मिलने पर इस पूरे धंधे में शामिल हर व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी

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