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लखनऊ समाचार

लखनऊ : समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की भारी जीत की भविष्यवाणी करते हुए इसे भाजपा की साजिश की नाकामी बताया है। यह बयान अमित शाह के बंगाल दौरे और ममता सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच आया है, जिससे आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनावों में जीत का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा की “साजिश” नाकाम होगी। लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा 2026 में पश्चिम बंगाल और 2027 में उत्तर प्रदेश दोनों चुनाव हार जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भारी बहुमत से जीतेंगी। ये भाजपा वाले हर जगह साजिश रचते हैं। इस बार उनकी साजिश नाकाम होगी। पहले वे बंगाल में हारेंगे, फिर उत्तर प्रदेश में भी हारेंगे।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कोलकाता दौरे के दौरान राज्य के भाजपा कार्यकतार्ओं को चुनाव के लिए जोरदार आह्वान किया। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाह ने कहा कि पिछले 14 वर्षों से पश्चिम बंगाल की पहचान भय और भ्रष्टाचार बन गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राज्य में अवैध प्रवासियों की कथित घुसपैठ के बारे में सवाल किया और उनकी सरकार पर सीमा बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने से इनकार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कोलकाता में भाजपा विधायकों और सांसदों की एक बैठक की अध्यक्षता भी की।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने शाह को महाभारत के एक पौराणिक पात्र दुशासन कहकर संबोधित किया। टीएमसी के स्थापना दिवस पर, उन्होंने मां-माती-मनुष्य के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया और आम जनता के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इसी बीच, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के अधिकारियों को विशेष गहन संशोधन सूची (रकफ) के आंकड़ों में हेराफेरी करने के लिए उकसा रहे हैं।
लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, ह्लजब मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी गिनती से चार करोड़ वोट घटा दिए गए हैं, तो असल में वे अधिकारियों को हेराफेरी करने के लिए कह रहे थे… इस समय सामने आ रहे आंकड़े साबित करते हैं कि चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी। क्योंकि अगर राज्य सरकार और रकफ के आंकड़ों में कोई विसंगति पाई जाती है, तो चुनाव आयोग को रकफ के उद्देश्य और पूरी संशोधन प्रक्रिया पर फिर से विचार करना होगा।ह्व मतदाताओं की सूची का विशेष गहन संशोधन (रकफ) राज्य में विवाद का विषय रहा है, जिसमें समाजवादी पार्टी ने चुनावी धांधली का आरोप लगाया है।

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