संभल समाचार
संभल जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के तबादले के बाद जिला न्यायालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।
बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया और इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया। वकीलों का कहना है कि यह तबादला न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह पूरा मामला संभल में हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, हिंसा प्रकरण में CJM विभांशु सुधीर ने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत एक अहम आदेश पारित करते हुए तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी समेत लगभग 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
आरोप है कि इस आदेश के बावजूद पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिससे विवाद और गहराता चला गया।
इसी घटनाक्रम के बीच CJM विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया। उनके स्थान पर आदित्य सिंह को नया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है।
आदित्य सिंह इससे पहले संभल की सदर शाही जामा मस्जिद से जुड़ी एक याचिका में दिए गए अपने फैसले को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति को लेकर भी न्यायिक और सामाजिक हलकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
CJM के तबादले के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना दिया। प्रदर्शन कर रहे वकीलों का कहना है कि यदि किसी न्यायिक अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के बाद इस तरह के प्रशासनिक फैसले लिए जाएंगे, तो इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे भविष्य में न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बढ़ सकता है।
अधिवक्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और न्यायिक आदेशों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कानून के शासन में न्यायालय के आदेश सर्वोपरि होने चाहिए और किसी भी स्तर पर उनकी अवहेलना नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, CJM के तबादले और वकीलों के विरोध ने कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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