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संभल समाचार 

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हुई बहुचर्चित हिंसा के मामले में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है।

हिंसा के दौरान तत्कालीन सीओ/एएसपी अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। इस तबादले के बाद जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

संभल हिंसा मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

आरोप लगाया गया था कि हिंसा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इन आरोपों में तत्कालीन सीओ/एएसपी अनुज चौधरी की भूमिका को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी।

मामले की सुनवाई करते हुए CJM विभांशु सुधीर ने उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर ASP अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

न्यायालय के इस आदेश को पुलिस महकमे के लिए असहज करने वाला कदम माना गया और यह मामला प्रदेश भर में सुर्खियों में आ गया।
अब CJM विभांशु सुधीर के तबादले के आदेश सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब संभल हिंसा मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस तबादले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि ASP अनुज चौधरी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त आदेश देने वाले न्यायिक अधिकारी का तबादला न्यायिक स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में देखा जा सकता है।

वहीं सरकार और प्रशासन का दावा है कि तबादले का हिंसा मामले या ASP अनुज चौधरी के केस से कोई संबंध नहीं है।

फिलहाल, संभल हिंसा और ASP अनुज चौधरी से जुड़े कानूनी प्रकरण पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अब देखना होगा कि नए न्यायिक अधिकारी के सामने यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया क्या मोड़ लेती है।