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आयोग हुआ सख्त अर्थ दंड लगाने के लिए दिया अंतिम अवसर

माफिया ने बगैर जमीन की रजिस्ट्री का कागजात जमा किए बगैर विद्यालय की मान्यता ले ली। अधिकारियों ने मान्यता कैसे दे दिया? एक बहुत जांच का विषय है! बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार इस समय चरम सीमा पर है। ट्रांसफर पोस्टिंग के अलावा शिक्षकों का बहुत बड़े पैमाने पर यहां उत्पीड़न किया जा रहा है। शिक्षकों के उत्पीड़न के साथ ही विद्यालयों को मान्यता दिए जाने के मामले में मनमानी तरीके से रिश्वत के बल पर मान्यता ले ली है। भू माफिया कमला शंकर मिश्रा के विद्यालय को मान्यता दिए जाने से स्पष्ट हो गया है कि बेसिक शिक्षा विभाग माफियाओं के इशारे पर चल रहा है और रिश्वत देकर यहां कैसा भी उल्टा सीधा काम कराया जा सकता है। लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि वह इस मामले की जांच कराए। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में जो भ्रष्टाचार व्याप्त है। अगर उसे भ्रष्टाचार में लिप्त भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों का कानून व्यवस्था के ऊपर से विश्वास उठ जाएगा। अधिकारियों की मनमानी के चलते शिक्षा विभाग की साख चौपट हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग में यही नहीं कई और अन्य विद्यालयों को इसी तरह मानता दे रखी है। जिन विद्यालयों के पास उनके भूमि का कागज नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह माफिया कमला शंकर मिश्रा ने पंचायत भवन की जमीन पर अवैध कब्जा किया और जिस विद्यालय की उसने मान्यता ली है। उस विद्यालय के नाम से कोई जमीन नहीं है। जब विद्यालय के नाम से कोई जमीन ही नहीं है। तो शिक्षा विभाग में उसे मान्यता कैसे दे दी? सबसे गंभीर जांच का विषय यही है। अब देखना है सूचना आयुक्त कार्यालय के समक्ष बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी क्या जवाब दाखिल करेंगे!

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