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चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मतदाता सूची से ऑनलाइन नाम हटाने या जोड़ने का अधिकार केवल उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारी के पास है। आयोग ने बताया कि राहुल गांधी ने जो जानकारी मांगी थी वह पहले ही पुलिस को दी जा चुकी है। आयोग ने स्वयं इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग पूरी तैयारी के साथ उतरा। राहुल ने जो जानकारी मांगी चुनाव आयोग ने तिथि के साथ बता दिया कि दो साल पहले ही वह मामले की जांच कर रही पुलिस को दिया जा चुका है।

छह सितंबर 2023 को ही आयोग अलांद के मतदाता सूची से ऑनलाइन नाम डिलीट करने के लिए आवेदन करने वाले का नाम, मोबाइल नंबर, रिफरेंस नंबर, इपिक नंबर, लॉगिन करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन मीडियम, आईपी एड्रेस, आवेदक का स्थान, तारीख, समय व यूजर आइडी बनाने की तिथि सबकुछ सौंप दिया था। यही वे जानकारी हैं जिसकी मांग राहुल ने गुरुुवार को अपने प्रेस कांफ्रेंस में की थ

आयोग ने खुद पुलिस में दर्ज कराई थी शिकायत

आयोग ने कहा है कि इसके अतिरिक्त भी जांच एजेंसी की ओर से मांगे गए अन्य दस्तावेज भी उसे मुहैया कराए गए है। जबकि इस गड़बड़ी पर आयोग ने 21 फरवरी 2023 को ही पुलिस में खुद ही एफआईआर दर्ज करायी थी।

राहुल गांधी के आरोप पर चुनाव आयोग का पलटवार

आयोग ने राहुल गांधी के आरोप पर पटलवार करते हुए कहा कि किसी के वोट को न तो ऑनलाइन डिलीट किया जा सकता है न ही जोड़ा जा सकता है।

मतदाता सूची से किसी का नाम को हटाने और जोड़ने का अधिकार सिर्फ मतदाता पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) जो उपजिलाधिकारी स्तर का अधिकारी होता है उसके पास ही होता है। वह भी किसी का नाम हटाने के लिए मिलने वाले आवेदन की पहले जांच करता है। उसके बाद उसे नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए समय देता है। जिसके बाद ही वह कोई फैसला लेता है।

ऐसे में राहुल गांधी का वोट डिलीट करने का आरोप गलत और आधारहीन है। वैसे भी कर्नाटक में हुए 2018 के विधानसभा चुनाव में अलांद सीट से जहां भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी, वहीं 2023 में इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि किसे फायदा पहुंचाने के लिए नाम डिलीट कराए जा रहे थे।

कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी की तरफ से उस घटना की विस्तृत जानकारी साझा की गई। उसमें बताया समेगया कि दिसंबर 2022 में एनवीएसपी, गरुड़ और वीएचए जैसे एप के जरिए 6018 फार्म 7 दिए गए। जिसमें से 24 आवेदन सही पाए गए जिसपर बाद में कार्रवाई हुई। ऑनलाइन इतनी बड़ी संख्या में आवेदन को संदिग्ध और गलत मानते हुए रद कर दिया गया था। एक नाम से कई आवेदन आए थे जिसके कारण संदेह गहराया था और उसके बाद इसकी शिकायत की गई।

चुनाव आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि राहुल गांधी जिस मोबाइल नंबर दिखा रहे हैं वह भी आयोग ने ही राज्य पुलिस की दी थी।

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